हनुमान जी पिछले जनम में कौन थे ?99 %हनुमान भक्त नहीं जानते ?

मित्रो आपने त्रेता युग में हनुमान भक्ति और महानता की कई कथाये सुनी होगी लेकिन क्या आपको पता है पवन पुत्र हनुमान सतयुग में कौन थे ?नहीं पता है तो आइये जानते है आज के हमारे इस आर्टिकल पे हनुमान जी पिछले जनम में कौन थे ?99 %हनुमान भक्त नहीं जानते ?

हनुमान जी पिछले जनम में कौन थे ?99 %हनुमान भक्त नहीं जानते ?

तो मित्रो ये बात है सतयुग की जब ऋषि वेदव्यास जी ने कुरुवंश के राजा परीक्षित से कहा राजन होनी होके रहती है इसे कोई बदल नहीं सकता आज मई तुम्हें वो रहष्य बताऊंगा जो बहुत ही कम लोग ही जानते है , एक समय संसार से जल तत्व गायब हो गया दुनिया में हर जगह त्रहि त्राहि मच गयी और जीवन का अंत होने लगा तब परम पिता ब्रम्हा जी ,भगवान् हरि नारायण और देवता ऋषिगण मिल कर सभी देवो के देव महादेव के पास गए ,भगवान के पास पहुंच कर वो शंकर जी से प्राथना करने लगे हे नथो के नाथ अब इस समस्या से आप ही छुटकारा दिला सकते है पृथ्वी पर ये जल तत्व वापस कैसे आएगा? कृपया इसका समाधान करे अब सभी देवता की प्रार्थना को सुनके भोलेनाथ ने 11 रुद्रो को बुला के पूछा ,”क्या आप में से कोई ऐसा है जो पृथ्वी को पुनः जल तत्व प्रदान कर सके ,11 में से 10 रुद्रो ने ये काम करने से मना कर दिया लेकिन 11 वा रूद्र जिसका नाम हर था उसने कहा, की मेरे करतल में जल तत्व का पूरा निवास है मैं दुनिया को पुनः जल तत्व प्रदान करूँगा लेकिन इसके लिए मुझे अपना शरीर गलाना पड़ेगा और सरीर गलने के बाद इस संसार से मेरा नामोनिशान मिट जायेगा तब महादेव ने हर रूपी रूद्र को वरदान दिया और कहा की इस रूद्र रुपी देह के गलने के बाद तुम्हें एक नया देह और नया नाम मिलेगा और मैं सम्पूर्ण रूप से तुम्हारे उस नए शरीर में निवास करूँगा जिसका जनम संसार के कल्याण के लिए होगा

अब इसके बाद हर रुपी नाम के रूद्र ने अपने सरीर को गला कर दुनिया को जल तत्त्व प्रदान किया और उसी जल से एक महाबली वानर का जनम हुआ जिसे हम और आप हनुमान जी के नाम से जानते है मित्रो ये घटना सतयुग के 4 चरण में हुई थी और महादेव ही पवन पुत्र हनुमान को राम नाम का रसायन प्रदान किया था इसके बाद ही उन्होनें राम नाम का जप शुरू किया और त्रेता युग में अप्सरा अंजना और वानर राज केसरी के पुत्र बन के उन्होंने जनम लिया

अब मित्रो इसी के साथ आपको ये भी बता देते है की भारत में आखिर वो कौन सी जगह है जहा हनुमान जी की पूजा नहीं होती है ?

मित्रो उत्तराखंड के चमोली में स्थित दुनागिरि गांव के बारे में ऐसा कहा जाता है की ये वो स्थान है जहा कभी त्रेता युग में हनुमान जी मूर्छित पड़े लक्ष्मण के उपचार के लिए संजीविनी बूटी लेने आये थे अब त्रेता युग में बजरंग बलि जिन जिन स्थानो में गए वो सभी आज एक पावन तीर्थ स्थानो के फल के रूप में जाने जाते है लेकिन इस स्थान पे आने के बावजूद यहाँ के लोग भगवान राम के भक्त पवन पुत्र हनुमान की पूजा नहीं करते है मित्रो इस स्थान पे न तो मारुती नन्दन हनुमान की पूजा के लिए कोई मंदिर है न ही इस गांव पे आपको कोई हनुमान जी का भक्त मिलेगा। मान्यता है कि जब त्रेता युग में युद्ध करते हुए लक्ष्मण जी रावण पुत्र इंद्रा जीत के बाण से मूर्छित हो गए थे तब लक्ष्मण जी के उपचार के लिए एक वैद्य जी ने हनुमान जी को संजीविनी बूटी खोजने को कहा जिसके बाद पवन पुत्र हनुमान संजीविनी बूटी को खोजते हुए हिमालय पहाड़ के स्थान पे इसी स्थान पर आये थे उस समय इसी गांव की एक स्त्री ने हनुमान जी को संजीविनी बूटी से जुड़े उस पर्वत का वो हिस्सा दिखाया जहा वो बड़ी मात्रा में उगती थी परन्तु इसके बावजूद भी जब पवनपुत्र को संजीवनी बूटी समाज नहीं आयी तो वो पूरा का पूरा पर्वत ही अपने साथ उखाड़ के ले गए और तब से ही यहाँ के लोग बजरंग बलि से नाराज है औरउनकी की कभी पूजा नहीं करते है मित्रो यही वजह है की यहां हनुमान जी की पूजा को गलत माना जाता है अब जाते जाते ये भी समझ लेते है की

हनुमान को सिन्दूर का चोला क्यों चढ़ाया जाता है ?

अब मित्रो पूजा के समय सिन्दूर के चोले का इस्तेमाल बहुत से देवी देवताओ को अर्पण करने के लिए किया जाता है लेकिन ये हनुमान जी को क्यों अर्पण किया जाता है आइये समझते है ऐसा इसलिए है की जब प्रभु श्री राम और माता सीता लक्षमण सभी साथ साथ अयोध्या लौट आये तब एक दिन हनुमान जी जानकी जी के कक्ष में जा पहुंचे वहां उन्होनें देखा की माता सीता लाल रंग की कोई चीज अपने मांग में चढ़ा रही है ये देख के उन्होंने माता सीता से पूछा,” माता ये क्या है जो आप अपनी मांग में सजा रही है हनुमान जी के प्रश्न का उत्तर देते हुए माता सीता ने कहा।,” ये सौभाग्य का प्रतीक सिन्दूर है और इसे मांग में सजाने से मुझे अपने स्वामी का स्नेह प्राप्त होगा और उनकी आयु भी लम्बी होगी इतना सुनते ही बजरंग बलि हनुमान ने अपने पुरे शरीर को लाल रंग से रंग लिया ,सिन्दूर लगाने के बाद हनुमान जी राम जी की सभा में चले गए जब राम चंद्र जी ने हनुमान जी से इस बारे में पूछा तब हनुमान जी ने उनको सारी बात बताई जिसको सुनके अयोध्या नंदन राम की आँखों में ख़ुशी के आँशु आ गए और उन्होंने पवन पुत्र को अपने गले से लगा दिया तो मित्रो आज हमने जाना की हनुमान जी अपने पिछले जनम में कौन थे और अब जानते है ?

जहा राम नाम की ध्वनियां गूंजती हैं यह मन्दिर भारत की इस जगह पर है

आप सुनकर हैरान रह जायेंगें की भारत के दक्षिण में एक ऐसा पर्वत है जहां राम नाम की ध्वनियां गूंजती हैं वो आवाज किसी और की नही बल्कि स्वयं हनुमानजी की है। आज हम आपको हनुमानजी से जुड़ी एक ऐसी रहस्यमई बात बताने जा रहे हैं जो अपने शायद ही इससे पहले सुनी होगी। इतना तो अभी जानते होंगे की भगवान हनुमान का जन्म कर्नाटक के किष्किंधा में एक पर्वत पर हुआ था.

लेकिन ये सबको आश्चर्यचकित कर देता है की इस पर्वत की एक शिला दूर से देखने पर उनके चेहरे जैसी आकृति बनाती है. यहां जाने वाला हर शख्स इसे देखकर चमत्कार ही कहता है. और भारत इन्ही चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध भी हैं। इस पर्वत पर ऊपर चढ़ने पर एक मंदिर है. ऐसा कहा जाता है यहां हनुमानजी का जन्म हुआ था। यहां हमेशा और लगातार कीर्तन चलता ही रहता है, ये पूरा इलाका बेहद आंखों को लुभाने वाला है. ऐसा तो मुमकिन नहीं की जिस जगह से राम का संबंध हो वहां हनुमान जी का जिक्र न पाया जाए। दरअसल इसी इलाके में भगवान राम ने सीताहरण के बाद कुछ वक्त व्यतीत किया था. इसी जगह को वानरों का गड़ भी कहा जाता था। अंजनी पुत्र के जन्म के कारण इसे अंजनी पर्वत भी कहा जाता है।

हनुमान जी पिछले जनम में कौन थे ?99 %हनुमान भक्त नहीं जानते ?

यहाँ मिलेगे हनुमान जी का जन्म के सबूत

ये वो जगह भी है, जहां दक्षिण भारत की पवित्र नदी तुंगभद्रा यानि पम्पा पहाड़ियों के बीच कल कल करती हुई इस जगह को खूबसूरत नजारे में बदल देती है. यहां ऊंची ऊंची पहाड़ियां हैं. दूर तक फैले हुए धान के खेत हैं. केले के बाग और जिधर देखो उधर नारियल के पेड़ों का झुंड. यहां आने पर हवा मोहक अंदाज में आपके कानों में अलग सा संगीत घोलती है. इसे किष्किंधा कहते हैं. जो कर्नाटक के बेल्लारी जिले में है. जिसके पड़ोस में एक और दर्शनीय स्थल हम्पी है, जो महान प्रतापी राजा श्रीकृष्णदेवराय की राजधानी थी. यहां जो भी जाता है उसे राम नाम के जाप की मधुर और मन को शांति पहुंचाने वाली आवाज सुनाई देती है।

वैसे तो आपको यहां खुद जाकर इस सुंदर दृश्य को अनुभव करना चाहिए। क्यों की यहां जाने के बाद बिलकुल अलग तरह की शांति मिलती है और ऐसा लगता है जैसे वास्तव में हम रामायण के उन पलों को अपनी आंखों से सामने दोहराते हुए देख रहे हैं। जहां हनुमानजी का जन्म हुआ, वो आज भी वहीं पर विराजमान है इस बात का सबूत ये राम नाम के जाप की ध्वनियां हमे देती हैं।

हनुमान जी पिछले जनम में कौन थे ?99 %हनुमान भक्त नहीं जानते ?

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