पति की मौत के बाद देवर से शादी करना सही या गलत ?Is Right Or Wrong To Marry Brother In Law

पति की मौत के बाद देवर से शादी करना सही या गलत ?Is Right Or Wrong To Marry Brother In Law

दोस्तों आपने कई बार सुना होगा पति की मृत्यु बाद स्त्री का विवाह उनके देवर से करवा दिया जाता है लेकिन क्या आपने सोचा है आखिर ऐसा क्यों किया जाता है ?और क्या पति की मौत के बाद देवर से शादी करना सही या गलत ?Is Right Or Wrong To Marry Brother In Law तो चलिए इस विषय में विस्तार से जानते है आज के हमारे इस आर्टिकल में

बात दे की लोग पति के मरने के बाद स्त्री की सुरक्षा और कुल को आगे बढ़ाने के लिए देवर से उनका विवाह करवा देते है उनका ये मान ना है की जब पुरुष विदुर होने के बाद दूसरा विवाह कर सकता है तो स्त्रियाँ भी ऐसा कर सकती है क्युकी पुरुष की तरह उनकी भी मानसिक शारीरिक जरूरते होती है और एक उम्र के बाद जब व्यक्ति सब सामाजिक बंधनो से दूर हो जाता है तब पति पत्नी ही एक दूसरे का सहारा बनते है उसमें एक साथि की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है लेकिन क्या आप जानते है की ऐसा करना तभी सही है जब इसमें महिला की भी हां शामिल हो यानि की जिस महिला का विवाह किया जा रहा हो उसमें उसकी भी सहमति शामिल हो नहीं तो कारण चाहे कुछ भी हो ऐसा बिलकुल नहीं करना चाहिए क्युकी एक स्त्री के लिए अपने छोटे भाई या बेटे के सामान देवर को पति के रूप में अपनाना मुश्किल होता है और ये आपकी सोच से परे है वैसे बता दे की ये सब कुछ आज से नहीं बल्कि पुरातन काल से होता आ रहा है

कहा जाता है की अयोध्या नंदन प्रभु राम ने दशानन रावण का वध करके जब विभीषण का राज्यअभिषेक किया तब उस समय उन्होंने ऐसा प्रस्ताव रावण की पत्नी महारानी मंदोदरी के सामने रखा उन्होनें मंदोदरी से विभीषण से विवाह करने का प्रस्ताव रखा लेकिन दोस्तों एक पतिव्रता महिला के लिए ये कितना कठिन होता है इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते है की ये सुनते ही मंदोदरी के पैरो से मानो जमीन ही फिसल गयी उन्होनें खुद को एक कमरे में बंद कर लिया फिर कुछ दिनों के बाद वो कमरे से बाहर आयी और उन्होंने बहुत सकोच करते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और अपने देवर विभीषण से विवाह किया कहते है की लंका पति रावण की भी यही अभिलाषा थी कहते है कि उसके आखिरी समय में जब मंदोदरी उससे मिलने गयी तब दशानन ने कहा था मुझे तो प्रभु श्री राम के हाथ मरके मोक्ष मिल जायेगा, लेकिन विभीषण हर पल धर्म के मार्ग पे चला है उसे राजपाट चलाने की उतनी समझ नहीं इसलिए उसे तुम्हरे मदद की जरूरत होगी ऐसे में तुम्हरा उससे विवाह कर लेना उचित होगा

साथ ही दोस्तों बता दे की बाली ने भी अपनी पत्नी के साथ यही किया था दरसल वानरराज बाली का विवाह समुन्द्र मंथन से निकली एक बेहद सुन्दर कन्या तारा से हुआ था, एक तरफ बाली के पराकर्म के चर्चे दूर दूर तक थे वही दूसरे तरह तारा की तारीफ करते देवता भी नहीं थकते थे और इतनी ही नहीं तारा को राजनीती का भी अच्छा ज्ञान था वो इन सभी बातों को अच्छे से समझती थी लेकिन जब बाली ने अधर्म का मार्ग चुन लिया तब उसके छोटे भाई सुग्रीव ने भगवन राम के हाथो उसका वध करवा दिया , कहते है जब बाली अंतिम सांसे गिन रहा था तब उसने अपनी पत्नी तारा से कहा की मेरी मृत्यु के बाद भी तुम्हारे यश और ऎश्वर्या में कोई कमी नहीं आनी चाहिए इसलिए मेरी ये इक्छा है की तुम मेरे छोटे भाई सुग्रीव से विवाह कर लो इतना कहते ही उसने तारा का हाथ सुग्रीव के हाथो थमा दिया अपनी पति की आखिरी इक्छा मानकर तारा ने वानरराज सुग्रीव से विवाह कर लिया और अपना बाकि जीवन सुग्रीव की पत्नी बन कर बिता दिया

वही मित्रो द्वापुर युग में कुंती पुत्र अर्जुन के बारे में भी कुछ ऐसा ही सुनने को मिलता है बता दे की अर्जुन ने भी अपने भाई की मृत्यु उन्हें अपनी पत्नी बना लिया लेकिन क्या आप जानते है की अर्जुन की वो भाभी थी कौन दरअसल महाभारत युद्ध के बाद धरम राज युदिष्ठर ने राज पाठ संभाला तो पारिवारिक सम्बन्धो का नया अध्याय लिखने का प्रयास किया जिसके कारन धृत्यार्थ पुत्र दुर्योधन की पत्नी भानुमति के सामने अर्जुन से विवाह करने का प्रस्ताव रखा गया अब भानुमति के लिए ऐसा करना बहुत मुश्किल था क्युकी उसने दुर्योधन को भी अपने पति के रूप में बहुत मुश्किल से स्वीकार किया था ऐसे में खुद को अपने पुनर्र विवाह के लिए तैयार करना वो भी अपने देवर से उसके लिए बहुत बड़ी बात थी लेकिन सभी के बारे में सोचते हुए उन्होंने ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और अर्जुन से विवाह कर लिया लेकिन दोस्तों आपको ये बता दे की धर्म के जानकारों का कहना है की ऐसा करना उचित नहीं है उनके अनुसार आमतौर पे विधवा स्त्री का विवाह उनके देवर से उनके वंश कुल को आगे बढ़ाने का लिए किया जाता है लेकिन धर्म शास्त्रों के अनुसार अगर किसी महिला के पति का निर्धन हो जाये तो उसे अपने स्वतंत्रा के द्वार खुद खोलने चाहिए उसे अपना पूरा ध्यान पूजा पाठ और सत्कर्मो में लगाना चाहिए। दूसरे की सेवा कर अपना मन शांत रखना चाहिए न की देवर से शादी करनी चाहिए क्युकी शास्त्रों में ऐसा कही नहीं लिखा की यदि किसी स्त्री की कोई संतान न हो तो मृत्यु के बाद उसे मोक्ष नहीं मिलेगा बल्कि ऐसी स्थिति में उसे अपने मन को परमात्मा के चरणों में लगाकर सब कुछ उन्ही को सोप देना चाहिए लेकिन मित्रो यहाँ सवाल ये उठता है की अगर किसी स्त्री का विवाह उसके देवर से विवाह करना गलत है तो पहले के युगो में ऐसा होता क्यों था ?

आप क्या सोचते है अपनी राय निचे कमेंट में जरूर लिख के बताये

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