निधिवन की असली कहानी क्या है ?श्रीकृष्ण का मायालोक या भूतो का अड्डा !

दोस्तों भारत में एक ऐसी धार्मिक जगह है जहा पर रात में आंखें खोलने पर कड़ी पाबंधी है क्युकी यहाँ कुछ ऐसा होता है जिसे देखने की permission किसी आम आदमी को तो छोड़िये यहां के पंडित तक को नहीं है ,ये सिलसिला सदियों पुराना है लेकिन इसे डरावनी रात का गवाह सालो से कोई नहीं बन पाया है जी हां हम बात कर रहे है निधिवन के जंगल की और ऐसा नहीं है की इसके बारे में जानने की किसी ने ने कोसिस नहीं की, लेकिन जिसने भी इससे पर्दा उठाने की कोशिश की वो इस जगह की हकीकत किसी दूसरे को बताने के लिए बचा ही नहीं जहा आज इंसान जमीन पे बैठे बैठे पूरी दुनिया देख सकता है फिर चाहे उसे वहा जाकर देखना हो या फिर इंटरनेट पर मगर जिस जगह की बात हम यहां कर रहे है वो कोई भी इंसान हो खास तौर पे रात को चाह कर भी नहीं देख सकता है क्युकी यहाँ कौन कब क्या देख सकता है ये इंसान नहीं बल्कि भगवान तय करते है और इसलिए इस इलाके में जाने वाले रातों रात दिन के उजाले में भी अपने कदम फूक फूक कर रखते है अब सवाल ये उठ ता है की क्या है इस रात का राज जैसा की हमने आपको बताया की हम यहां बात कर रहे है यमुना नदी के किनारे बने निधिवन की जहा पर माना जाता है कि आज भी भगवान कृष्ण अपनी गोपियों ,राधा रानी के साथ रास लीला मानाने आते है लेकिन मित्रो क्या ये सच में मुमकिन है या भगवान की आड़ में ये जंगल भूतो का घर बन गया है अच्छा इंसानी जहन या फिर इंसानी यकीन को तो डगमगाया जा सकता है या फिर किस्से कहानी पर तो यकीन करने के लिए उसे मजबूर किया जा सकता है लेकिन जानवरो पे किसी का बस नहीं चलता है और वो बस वही करते है जो उनको करना होता है तो

आखिर क्या वजह है की इस इलाके के सभी जानवर शाम होते ही अपना ठिकाना बदल लेते है ये जानने से पहले निधिवन के बारे में कुछ जान लेते है ?

ये जगह यमुना नदी के किनारे है और काफी सुन्दर है यहां के दर्शन करने के लिए लोग काफी दूर दूर से आते है अब यहाँ की एक खास बात है आपने भी जौर्नाली देखा होगा की हमारे ,आपके घरो में तुलसी के पोंधे लगाए जाते है और वो ज्यादा तर गमलो में ही लगाए जाते है या फिर अगर कोई जमीन में लगा भी हो तो उसकी लम्बाई ज्यादा नहीं होती पर निधिवन के जंगल में आपको तुलसी के बड़े बड़े पेड़ मिलेंगे लेकिन इन पेड़ो के बारे में भी extraodinary बात ये है की लोगो का मानना है की ये सिर्फ पेड़ नहीं है बल्कि ये गोपियाँ है जो अँधेरे के साथ साथ अपना असली रूप ले लेती है अच्छा अगर किसी ने अगर गुपचुप तरीके से यहां के पेड़ो की पत्तिया ले जाने की कोसिस की तो उसे अपनी जिंदगी में कई तरह का दिक्कतों का सामना करना पड़ा है यानि की निधिवन की एक एक एक चीज श्री कृष्ण और राधा रानी की लीला का हिस्सा बनती है कहते है की मंदिर के परिसर पे लगे हुए पेड़ भी बहुत ही अजीबो गरीब है और इन पेड़ो की शाखाएं ऊपर की तरह नहीं निचे की और बढ़ती है वही निधिवन के मंदिर में शाम की आरती के बाद सभी भक्तो को बाहर निकाल दिया जाता है और फिर इस जगह को साथ 7 तालों से बंद कर दिया जाता है

निधिवन का रहस्य, क्या सच में रास रचाने आते हैं रात में राधा कृष्ण

अब आपको ये भी बता दे की इस जगह पे झाड़ियों के बीच छोटा सा महल है जिसकी छत के निचे हर रोज महन्त लोग श्रीकृष्ण का बिस्तर लगाते है और साथ ही नीम की दांतुन पान का बीड़ा श्रृंगार का सामान और लड्डू रख देते है फिर इसके बाद वहा कोई नहीं रहता फिर उसे ७ तालो लगा कर पूरी तरीके से खाली कर दिया जाता है लेकिन आपको ये जानकर विश्वास नहीं होगा की जब सुबह मंदिर खोला जाता है तो बिस्तर पर सिलवटे होती है और दांतुन चबाई हुई मिलती है इतना ही नहीं पान चबाया हुआ लड्डू खाया हुआ और श्रृंगार का सामान ऐसे बिखरा हुआ होता है मानो उसे किसी ने इस्तेमाल किया हुआ हो

अब दोस्तों श्रीमत भगवत गीता में कहा गया है की आज भी शरद पूनम में निधिवन में खास रासलीला होती है जिसे कोई देख तो नहीं पाता है लेकिन उसे महसूस किया जा सकता है इसी के साथ एक और खास बात ये भी है की यहां आस पास बने ज्यादातर घरो में खिड़की नहीं है और जिन घरो में है वो शाम की आरती के बाद उसे बंद कर देते है और भूल कर भी वो रात को मंदिर की दिशा में खिड़किया नहीं खोलते है क्युकी रासलीला को देखने वाला इंसान या तो अँधा हो जाता है या अपनी जान से हाथ धो बैठता है दोस्तों आज के समय में रासलीला को बहुत ही गन्दी नजर से देखा जाता है और इसका पूरा श्रेय जाता है हमारे बॉलीवुड को जिसने रासलीला की मानो इमेज ही खराब कर दी अब जिन लोगो को रासलीला का मतलब नहीं पता उनको बता दे की इसका मतलब होता है अपने आराध्य को प्राप्त करने की इक्छा रखना और इस इक्छा का वासना से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं होता है अब इसे आसान भाषा में समझा जाये तो जो भक्त और भगवान का साक्षातार रास के रूप में यानि नृत्य के रूप में होता हो उसे ही असली रास लीला कहते है इंग्लिश में भी इसका मतलब यही होता है dancing with divine love और आपकी भी इसका मतलब इंटरनेट पे जा के पड़ सकते है अब ये होगी रासलीला की बात

अब वापस आते है

निधिवन की असली सचाई ?

इस परिसर की चारदीवारी लगभग 10 फीट ऊंची है और बाहर के चारों ओर रिहायशी इलाका है जहां चारों ओर दो-दो, तीन-तीन मंजिला ऊँचे मकान बने हुए है और इन घरों से निधिवन की चारदीवार के अन्दर के भाग को साफ-साफ देखा जा सकता है। वह स्थान जहाँ रात्रि के समय रासलीला होना बताया जाता है वह निधिवन के मध्य भाग से थोड़ा दक्षिण दिशा की ओर खुले में स्थित है है जहां चारों ओर दो-दो, तीन-तीन मंजिला ऊँचे मकान बने हुए है और इन घरों से निधिवन की चारदीवार के अन्दर के भाग को साफ-साफ देखा जा सकता है। वह स्थान जहाँ रात्रि के समय रासलीला होना बताया जाता है वह निधिवन के मध्य भाग से थोड़ा दक्षिण दिशा की ओर खुले में स्थित है।

यदि सच में रासलीला देखने वाला अंधा, गूंगा, बहरा हो जाए या मर जाए तो ऐसी स्थिति में निश्चित ही आस-पास के रहने वाले यह इलाका छोड़कर चले गए हाते। निधिवन के अन्दर जो 15-20 समाधियां बनी हैं वह स्वामी हरिदास जी और अन्य आचार्यों की समाधियां हैं जिन पर उन आचार्यों  के नाम और मृत्यु तिथि के शिलालेख लगे है। इसका उल्लेख निधिवन में लगे उत्तरप्रदेश पर्यटन विभाग के शिलालेख पर भी किया गया है।

इन्हीं समाधियों की आड़ में ही गाईड यह भम्र फैलाते है कि जो रासलीला देख लेता है वह सांसारिक बन्धन से मुक्त हो जाता है और यह सभी उन्हीं की समाधियां हैं। रंगमहल के अन्दर जो दातून गीली और सामान बिखरा हुआ मिलता है। यह भ्रम इस कारण फैला हुआ है कि रंग महल के नैऋत्य कोण में रंग महल के अनुपात में बड़े आकार का ललित कुण्ड है जिसे विशाखा कुण्ड भी कहते हैं।

जिस स्थान पर नैऋत्य कोण में यह स्थिति होती है वहां इस प्रकार का भ्रम और छल आसानी से निर्मित हो जाता है। यहां जो वृक्ष आपस में गुंथे हुए हैं इसी प्रकार के वृक्ष वृन्दावन में सेवाकुंज एवं यमुना के तटीय स्थानों पर भी देखने को मिलते है।

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