इन 5 लक्षणों से होती है दुष्ट स्त्री की पहचान

स्त्री अगर दुष्ट होती सब कर देती है मित्रो ये तो आपने सुना ही होगा ,आपने ये भी सुना होगा की स्त्री घर की लक्ष्मी होती है ये सही भी है अगर स्त्री धनवान और चरित्रवान है तो वो घर को स्वर्ग बना देती है यदि आपका सम्बन्ध एक ऐसे स्त्री से हो जाता है जो प्रवृति से बड़ी दुष्ट हो तो हो सकता है जल्दी आपका सब कुछ तबाह हो जाये

आइये जानते है कैसे ?

महाभारत पुराण में वर्णित कथा के अनुसार प्राचीन काल चीन कल में तुंगभद्रा नदी के तट पर एक सुन्दर नगर में आत्मदेव नाम का धरम परनारायण भ्रमण रहता था उसका विवाह धुंधली नामक उच्च कुल की सुन्दर कन्या से हुआ, विष भरा रास जितनी ही सुन्दर थी उसका स्वभाव उतना ही दुष्ट था लोभी ईर्ष्यालु और कुर्र थी वह बहुत ही कुर्र थी कलहणिनी पत्नी के साथ रहकर भी आत्मदेव अपनी गहस्थी संतोष पूर्वक चला रहे थे , किन्तु विवाह के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दम्पति को कोई भी संतान नहीं हुई इसके लिए कई निष्ठां सब निष्फल रहे हताश हो के प्राण त्याग की मंशा से आत्मदेव अपना घर छोड़ दिया अज्ञात दिशा में जा रहे आत्मदेव को मार्ग में एक सरोवर मिला उसी तट के किनारे बैठ गए तभी वहां से एक तेजश्वी संयान्शी वहा से गुजर रहे थे ,आत्मदेव को इस प्रकार दुखी देख के उन्होनें चिंता का कारन पूछा आत्मदेव ने अपनी एक मात्र चिंता को विस्तार से बताया तो उसके तेजश्वी सन्याशी ने उसके ललाट को देख के बताया कि निश्चित रूप से तुम्हारे मष्तक की रेखाएं बताती है की तुम्हारे पुनर्जन्म के कर्मो के अनुसार तुम्हें संतान की प्रप्ति नहीं होगी इसलिए ये विचार छोड़ के संतोष कर लो और आत्मभजन शुरू कर दो आत्मदेव ने जब ये हट पूर्वक ये कहा की ,”बिना संतान की उसके कोई इक्छा नहीं है तो तेजश्वी सन्यासी ने उसे एक दिव्य फल दिया और उसे अपनी पत्नी को खिला देने का निर्देश दिया ,आत्मदेव घर लौट गए और उसने सारी कहानी बताने के बाद फल खाने का आदेश दिया लेकिन उस दुष्ट कन्या ने संतान के समय उत्पन्न होने वाली भारी कष्टों से बचने के लिए उस फल को खाने के बजाय छुपा दिया और आत्मदेव से झूट कह दिया की उसने फल कहा लिया है

कुछ दिन बाद धुधलीं की बहन मृदुली उससे मिलने आयी हाल चाल बताने में धुंधलीं ने अपने झूठ के बारे में उसको बता दियाऔर भेद खुलने की चिंता भी व्यक्त कर दी मृदुली ने अपनी बहन को चिंतित देख कर एक योजना बना डाली उसने कहा की वो अपने गर्भ में पल रहे शिशु होने के बाद उसको सोप देगी और उस टाइम धुंधली गर्भवती होने का स्वांग करने लगी, घर के भीतर परदे में ऐसा करना कठिन नहीं था यह भी तय किया गया की मृदुली अपने प्रसव के बारे में ये बता देगी की जनम के बाद उसका पुत्र मर गया आगे चल कर सारा कार्य योजना मुताबिक किया गया और सन्यासी द्वारा दिया गया फल को खिला दिया गया मृदुली के पुत्र का जनम हुआ उसने अपना पुत्र धुंधली को सोप दिया धुंधली ने उसका नाम ढूंडकरी रखा दूसरे तरफ गाय को फल खिलाये जाने के कारन उसने भी एक पुत्र को जनम दिया उसका सरीर तो इंसान की तरह था परन्तु कान इंसान की तरह इसलिए उसका नाम गोकर्ण रख दिया गया

समय बिता और दोनों बालक युवा हो गए गोकर्ण अपने अच्छे कर्मो के कारन एक विद्वान व्यक्ति बने वही ढूंडकरी अपने रक्षिस प्रवर्ति के कारन निरंतर तामसिक ,आपराधिक गतिविधियों में समाहित होता चला गया. धुंधकारी के पिता उसकी हरकतों से परेशान हो चुके थे वो उनकी एक नहीं सुनता था हर दिन खेलता मदिरा पिता और जो समय बचता उसमें वेश्यालय के समय काट ता था तब उन्होनें इस पीड़ा से निजात पाने का गोकर्ण से पूछा तो उन्होंने पिता को संन्यास की सलाह दी। पिता के सन्याश ग्रहण कर जाने के बाद धुंधकारी ने पैसे और सम्पति के लिए अपनी माँ धुंधली को मारना शुरू कर दिया और उसके साथ ही अपने घर में अपनी विलासिता पूर्ति को पूरा करने के लिए पांच वेश्याओं को ले आया अपने बेटे की इस हरकत को देखकर धुंधली ने आखिरकार कुओ में कूद कर अपनी जान दे दी माता की मृत्यु के बाद धुंधकारी की वेश्यताएं और बढ़ गयी और वो वेश्याओं पर और अधिक , उनकी और पूरा करने के लिए उसने चोरी करना और डाका डालना शुरू कर दिया जब डाका डालने की बात वेश्याओं को पता चली तो वो डर गयी की इसने चोरी करना शुरू कर दिया यह एक दिन जरूर पकड़ा जायेगा तब राजा सारा धन और सम्पति छीन लेगा और उसके अंदर हमें भी फांसी के फंदे पर लटका देगा इस पर उन्होनें निश्चय किया की वो ऐसा कुछ घटित होने से पहले ही धुंधकारी को मार देगी और एक रात जब वो लौट कर सोना इत्यादि लेकर आया तो उन 5 वेश्याओं ने मिलकर उसके गले में फांसी का फंदा लटका कर उसे मारने की कोसिस की लेकिन जब वो ऐसे नहीं मारा तो धुंधकारी के मुँह में धुंडकटे हुए अंगारे doosh दिए और कुछ समय के बाद ही उसका देहांत हो गया और उन्होंने उसके सरीर को खड्डा खोद कर गाड़ दिया और उसके द्वारा लूटा हुआ सोना और धन लेकर वह वह से निकल गयी

वो पंचम जब धुंधकारी को मौत के घाट उतार रही थी तब धुंधकारी ये सोच रहा था की बुद्धिमान पुरुष स्त्रियों से हमेशा दूरिया बना कर ही रहे ऐसे राष्टीय अपनी मिट्ठी वाणी से आपके ह्रदय में अमृत का संचार करेगी लकिन अंदर ही अंदर वो जहर पाल रही होगी और चुरा तेज कर रही होगी की जब भी मौका मिलेगा वो आपकी गर्दन को धड़ से अलग कर देगी

एक दुष्ट स्त्री धुंधली थी जिसने उसके पिता आत्मदेव का जीवन बर्बाद कर दिया दूसरी ये पांचो वेश्या जो उच्च कोटि की दुष्ट निकली और धुंधकारी को मौत के घाट उतार दिया तो दोस्तों इस आर्टिकल पे बस इतना ही आगे आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो एक लाइक जरूर करे

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